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Tuesday, October 6, 2009

वो जब याद आये, बहुत याद आये...





चंडीगढ़ प्रशासन को भी आज इस शहर का नक्शा बनाने वाले आर्कीटेक्ट ली कर्बुजिये बहुत याद आये. सेक्टर 19 में उनकी डिजाइन की चीजों को इकट्ठा करके बनाए गए ली कर्बुजिये सेंटर में उनकी ढेर सारी फोटो, उनके लिखे ख़त और बंजर ज़मीन पर एक शहर को बसाने का अक्स खींचते कार्बुजिये और उनकी टीम के लोगों के कुछ बेहद दुर्लभ फोटो.
आज यानी 6 अक्टूबर को उनका जन्मदिन होता है. इसके चलते आज कार्बुजिए सेंटर में रौनक थी. पत्रकार लोग आये हुए थे. इधर-उधर की फोटो खींचते हुए. किसी एक्सक्लूसिव स्टोरी की खोज में. किसी का ध्यान इस ओर नहीं गया कि कार्बुजिये का जन्मदिन का महत्व इस शहर की पुरानी तस्वीरों को देखकर आज के शहर के हालातों के साथ जोड़कर देखने के बाद ही है. आज इस शहर की जो हालत हो गयी है, शर्तिया तौर पर कार्बुजिये ने ऐसा शहर बसाने का नक्शा नहीं खींचा था.
खैर, सेंटर में लगाई प्रदर्शनी में कुछ रोचक जानकारी मिली. कुछ दुर्लभ फोटो देखने को मिले जिन्हें आप भी देख सकते हैं इस पेज पर. इनसे पता चलता है कि कार्बुजिये कितने जिंदादिल और दूरदर्शी थे. शिवालिक की पहाडी की तलहटी में खड़े बंजर ज़मीन के टुकड़े पर पर एक खुशहाल शहर को देख पाना आम इंसान की सोच से परे की बात होती है.
कार्बुजिये को 1952 में चंडीगढ़ बसाने का जिम्मा मिला था और वे अपने चचेरे भाई पिएरे जेनरे के साथ यहाँ पहुंचे थे. एक और रोचक बात कार्बुजिये के बारे में जानने को मिली और वह यह कि वे 'स्विस' थे जन्म से, न कि 'फ्रेंच' जैसा कि उनके बारे में प्रचलित है. उनका जन्म स्विटजेरलैंड में 1887 में हुआ था और उनका असली नाम 'चार्ल्स एडवर्ड जेनरे' था. उन्होंने पहला काम उनका खुद का ऑफिस बनाने का किया था जहाँ आज यह कार्बुजिये सेंटर बना हुआ है. प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरु प्रोजेक्ट चंडीगढ़ को देखने 3 अप्रैल 1952 को चंडीगढ़ आये थे. उसके बाद उन्होंने सचिवालय बनाया और उसी दौरान उनके चचेरे भाई पिएरे जेनरे ने एसदी शर्मा और एम्एन शरण के साथ मिलकर अस्पताल, सेक्टर 22 की डिस्पेंसरी और सरकारी मकान बनाए.
एक और बात जो मुझे आज पता चली और वह भी सेंटर के इंचार्ज वीएन सिंह से. उन्होंने मुझे दो चित्थिआं दिखाई. एक वह जो नेहरु ने पंजाब के मुख्यमंत्री सरदार परताप सिंह कैरों को लिखी थी जिसमे उन्होंने कहा था कि सुखना झील के पास कैंटनमेंट बनाने का प्रस्ताव रद्द कर दें क्योंकि यह कार्बुजिये को पसंद नहीं था. नेहरु ने लिखा कि ' कार्बुजिये का सुझाव कीमती है'. दूसरी चिट्ठी कार्बुजिये की लिखी है जो उन्होंने पंजाब के गवर्नर सीपीएन सिंह को 15 जुलाई 1954 को लिखी थी. इसमें कहा गवर्नर हाउस बनाने पर लगा उनका खर्च और वेतन जारी करवा देने को कहा गया है. जाहिर है, भारतीय लाल फीताशाही का मजा कर्बुजिये ने भी चखा था .
पता यह चला है कि कार्बुजिये कि लिखी इस चिट्ठी पर कारवाई हुयी थी और सरकारी खजाने से पैसा भी जारी हुआ लेकिन उसे कौन ले गया, इसके बारे में किसी के पास कोई जानकारी नहीं है.
महान आर्कीटेक्ट कार्बुजिये के जन्मदिन की बधाई.

2 comments:

वन्दना अवस्थी दुबे said...

वाह सचमुच दुर्लभ तस्वीरें. कर्बुजिये जी को हमारी भी बधाई.

समयचक्र - महेंद्र मिश्र said...

आर्कीटेक्ट कार्बुजिये के जन्मदिन की बधाई. अच्छी जानकारी प्रस्तुति के लिए आपको भी धन्यवाद